UPSC परीक्षा: तीसरे प्रयास में 44वां रैंक लाकर दिव्यांशु ने बढ़ाया लखनऊ का मान, इस चीज का सदेव रहेगा गम

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UPSC Exam: By bringing 44th rank in the third attempt, Divyanshu increased the value of Lucknow
UPSC परीक्षा: तीसरे प्रयास में 44 वां रैंक लाकर दिव्यांशु ने बढ़ाया लखनऊ का मान, इस चीज का सदेव रहेगा गम

लखनऊ के दिव्यांशु (IAS Topper) ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 44 वां स्थान प्राप्त कर राजधानी लखनऊ का नाम बढ़ाया है। इंद्रानगर निवासी दिव्यांशु ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में 44वां स्थान प्राप्त कर IAS बनने का सपना साकार किया है। गौरतलब है की यह दिव्यांशु का तीसरा प्रयास था। आपको बता दें की परीक्षा में कुल 761 उम्मीदवार अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, जिसमें से 545 पुरुष और 216 महिला शामिल थी ।

इस उपलब्धि को किया अपने पिता स्वर्गवासी श्री श्याम कुमार निगम को समर्पित

दिव्यांशु निगम जी ने अपने इस सर्वोच्च उपलब्धि को अपने पिता को समर्पित किया। जहां उनकी हाल में मृत्यु हुई थी। आपको बता दें की दिव्यांशु निगम के पिता स्वयं इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में कार्यरत थे।

रिजल्ट आने से पूर्व हुई थी पिता की मृत्यु

UPSC परीक्षा: तीसरे प्रयास में 44 वां रैंक लाकर दिव्यांशु ने बढ़ाया लखनऊ का मान, इस चीज का सदेव रहेगा गम

दिव्यांशु निगम के जीवन की जब उन्हें सबसे बड़ी खुशी मिली तब उनके पिता उनके साथ नहीं थे इसका मलाल उन्हें हमेशा रहेगा लेकिन उनका आशीर्वाद और दी है सीख हमेशा दिव्यांशु के साथ रहने वाली है ।

शिक्षा कहाँ से की प्राप्त

दिव्यांशु ने प्रारंभिक शिक्षा यूपी के कानपुर से पूरी की, जहाँ लखनऊ से ट्रांसफर होने के बाद वह कानपूर चले गए थे । वहीं उन्होंने इंजिनियरिंग की पढ़ाई बिट्स पिलानी से किया । केमिकल इंजीनियरिंग स्ट्रीम से उन्होंने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की । इसके उपरांत उन्होंने यूपीएससी की पढ़ाई प्रारंभ की। दो बार विफल रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगे रहे । इसका ही नतीजा है की तीसरे प्रयास में उन्होंने इतिहास रच दिया ।

तीसरे प्रयास में रचा इतिहास

पहले दो प्रयास में विफल रहे दिव्यांशु ने हार नहीं मानी और यह साबित कर दिया की जीत जितनी कठिन हो स्वाद उसका उतना ही मीठा होता है। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने बाजी जीत ली ।

प्रेरणा

दिव्यांशु निगम के अनुसार उनके पिता उनके प्रेरणा का आधार रहे हैं। जो खुद इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में कार्यरत थे।  वहीं उनकी माता स्मिता निगम हमेशा उन्हें मोटिवेट करती रहीं।  दिव्यांशु के अनुसार प्रेरणा को खुद अपने अंदर ढूंढने का प्रयास कीजिए क्योंकि बाहर की प्रेरणा कुछ दिन में खत्म हो जाती है अगर आप अंदर से प्रेरित रहेंगे और लक्ष्य के प्रति सचेत एवं अनुशासन से पढ़ाई करेंगे तो जीत आपकी पक्की है।

युवाओं के लिए दो शब्द

दिव्यांशु निगम के अनुसार अनुशासन के साथ पढ़ाई करते रहें। नियमित तौर पर पढ़ाई करें 1 दिन में 8 से 10 घंटे के पढ़ाई काफी होती है अतः अनुशासन बनाकर रखें ।लक्ष्य के प्रति सचेत रहें। हमेशा आशावादी रहें ।

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