
उत्तर रेलवे लखनऊ स्टेशन पर लाइसेंस धारी सहायकों की निर्धारित मजदूरी तय कर दी गई है। जहां कार्य के विवरण को कुल 6 श्रेणी में बांटा गया। अक्सर लोग कुलियों पर निर्धारित मजदूरी से अधिक मजदूरी लेने का आरोप लगाते हैं । कुछ गलत टिप्पणियां करते हैं तो कुछ उनके पक्ष में बोलते हैं । आज इस खबर के बाद हमें सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी आरोप-प्रत्यारोप की संभावना ना रहे ।जहां लखनऊ वासी को लखनऊ स्टेशन पर लाइसेंस धारी सहायकों की निर्धारित मजदूरी ही देनी पड़े।
लखनऊ स्टेशन पर लाइसेंस धारी सहायकों की निर्धारित मजदूरी निम्नलिखित हैं

| कार्य का विवरण | प्रति फेरा (20 मिनट तक) | प्रभार 20 मिनट के बाद प्रत्येक आधे घंटे बाद 30 मिनट | |
| 1 | 40 किलोग्राम का सामान उठाने के लिए (प्रथम 20 मिनट के लिए प्रीति फेरा) | 35 | 35 |
| 2 | दो सहायकों द्वारा दो पहिया ठेला से 2 क्विंटल वजन तक सम्मान हेतु दोनों में से प्रत्येक कुली को | 60 | 60 |
| 3 | व्हीलचेयर या स्ट्रेचर से बीमार विकलांग को ले जाने हेतु प्रति फेरा | 70 | 70 |
| 4 | लखनऊ उत्तरी रेलवे से पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन एवं द्वितीय निकास 40 किलोग्राम तक ले जाने के लिए | 40 | 40 |
| 5 | लखनऊ उत्तरी रेलवे से पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन तक व्हीलचेयर या स्ट्रेचर से ले जाने के लिए | 80 | 80 |
| 6 | दो सहायकों द्वारा चार पहिया ठेला से 2 क्विंटल वजन से अधिक सम्मान हेतु दोनों में से प्रत्येक कुली को | 90 | 90 |
लोगों द्वारा अक्सर लगाए जाने वाले मनमाने भाड़े पर क्या बोले लखनऊ कुली अध्यक्ष सुरेश यादव
लखनऊ चारबाग स्टेशन पर कार्यरत लाइसेंस धारी सहायक सुरेश यादव जो खुद कुली संघ के अध्यक्ष हैं उनसे बातचीत के दौरान उनका दर्द छलका । जहां उन्होंने यह कहा कि अक्सर हम यात्रियों से यह सुनते हैं कि कुली हमसे मनमाने पैसे ले रहे हैं ।लेकिन ऐसा नहीं है कोई उनसे मनमानी पैसा नहीं लेता है ।कुछ यात्रियों का कहना यह होता है कि कुली उनका सामना प्लेटफार्म पर छोड़कर चला जाये । वहीँ कुछ का कहना होता है की उनके सामान को वह ट्रेन के अंदर लेकर छोड़े इसलिए वह वेटिंग चार्ज का अधिक किराया चार्ज करता है ।
लोगों को पता नहीं होने के कारण वाला बुरा सुनाते हैं जो इंसानियत के नाते सरासर गलत है। दूसरी ओर कुली संघ के अध्यक्ष का कहना है की वे यात्रियों को ये कहते हैं की चाहे आपकी ट्रेन कितनी भी लेट हो हम आपका सामना ट्रेन में चढ़ा देंगे और उसके लिए वह एक मुस्त पैसे की बात कर यात्री से रेट तय कर लेते हैं जिससे दोनों ओर से परेशानी ना आये ।
दूसरों का बोझ उठाने वाले का रेलवे प्रशासन नहीं उठा पा रही है बोझ

सुरेश यादव अनुसार उनकी स्थिति बेहद विषम है ।जहां उन्हें मदद की आवश्यकता है ।सरकार से गुहार लगाने के बावजूद उनकी कुछ जायज मांगे हैं वह पूरी नहीं हो पा रही है ।जिसका उन्हें कष्ट है । ना उन्हें मेडिकल की सुविधा ना उन्हें वर्दी की अब सुविधा है । वही ना उनके पास बीमा है और ना ही एक बंधा पगार । उनका कहना है कि वह एक राष्ट्रीय मजदूर है जो कि हर एक दिन काम करके अपने घर का भरण पोषण करते हैं। रेलवे और सरकार द्वारा उन्हें आश्वासन तो मिलता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है ।बढ़ती महंगाई एवं विषम परिस्थितियों में उनका भविष्य अंधकार में जिसे सरकार को सोचना चाहिए।









