
लखनऊ 7 सितम्बर :पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम होती भी नजर नहीं आ रही है। जहां हाईकोर्ट ने आजम खान को एक और करारा झटका दे दिया है ।गौरतलब है कि जौहर ट्रस्ट के पास कुल 471 एकड़ की जमीन थी वही हाई कोर्ट के निर्णय के बाद जौहर ट्रस्ट का केवल 12.50 एकड़ जमीन ही उनके पास रहेगी। इलाहाबाद कोर्ट ने राज्य सरकार द्धारा लिए जाने वाले जमीन अधिग्रहण को चुनौती याचिका को रद्द कर दिया है।
साल 2005 में कुल 471 एकड़ भूमि पर किया गया था अधिग्रहण
गौरतलब है कि साल 2005 में आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के लिए 471 एकड़ जमीन को अधिकृत कर लिया था।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब महज 12.50 एकड़ जमीन ही रहेगी ट्रस्ट के पास
गौरतलब है एसडीएम द्वारा जारी किया गया रिपोर्ट में कहा गया है निर्माण नियमों में उल्लंघन हुआ है। दूसरी ओर आजम खान के पक्षकार ने यह दलील दी एसडीएम द्वारा जारी किया गया रिपोर्ट द्विपक्षीय नहीं है ।वह केवल एक पक्ष से सोचा गया है एवं यह भी कहा गया इस सचिव एवं अध्यक्ष को कोई भी नोटिस नहीं भेजी गई थी।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा की जिलाधिकारी ने अनुसूचित जाति की जमीन बिना अनुमति के अवैध रूप से अधिग्रहित की थी, जहां पर का साफ तौर पर उल्लंघन किया गया था। वही जहां शैक्षिक कार्य के लिए भवन का निर्माण होना था वहां पर मस्जिद का निर्माण कराया जाने लगा। हाईकोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि कुल 26 किसानों ने आजम खान के ट्रस्ट के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी,जिनके जमीन को जबरन हासिल किया गया था।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल का बयान
वर्तमान सरकार द्वारा यह कहा गया कि जमीन अवैध रूप से 26 किसानों से ली गई है और यह अवैध अतिक्रमण का मामला है। वहीँ सार्वजनिक जमीन का उपयोग निजी कार्य के लिए किया गया ।जमीन को मनमाने तरीके से अधिग्रहण किया गया और शर्तों की अनदेखी की गई है ।विद्यालय परिसर में मस्जिद का निर्माण कराया जाने लगा वहीं हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जिन शर्तों का पालन उन्हें करना था उन्होंने शर्तों का पालन नहीं किया शर्तों का उल्लंघन करने की वजह से राज्य सरकार जमीन वापस ले सकती है।









