लखनऊ : कोरोना का सेकेंड वेव कितना भयावह था इसकी गवाह लखनऊ के साथ पूरा देश है। इन सभी को दरकिनार करते हुए लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्पताल की डॉक्टर शारदा ने जो किया उसका ऋणी पूरा लखनऊ शहर रहेगा। प्रेगनेंट होने के बाबजूद उन्होंने कोरोना के मरीजों का इलाज रात दिन करती रहीं।
परिवार से पहले देश
अपनी परिवार अपने होने वाले बच्चे से पहले उन्होंने देश को रखा। प्रेगनेंसी में भी लोहिया संस्थान की रेजिडेंट डॉक्टर शारदा सुमन कोरोना पेशेंट की इलाज करती रहीं।
फैला संक्रमण
डॉक्टर शारदा खुद कोरोना वायरस संक्रमण के चपेट में आ गई। संक्रामण इतना भयंकर फैला की लंग्स ट्रांसप्लांट करने की नौबत आ गई। जिसके लिए उन्हें हैदराबाद के किम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया । जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांसे गिनी ।
प्रेग्नेंसी के बावजूद ड्यूटी में कार्यरत रहीं डॉक्टर शारदा के अदम्य साहस ,अतुलित बलिदान तथा निस्वार्थ भाव से सेवा को देश के साथ पूरा लखनऊ याद करेगा।
शारदा को किया गया था एअरलिफ्ट
लखनऊ की डॉ शारदा हार गई जिंदगी की जंग, प्रेगनेंसी में भी किया ड्यूटी, इस वारियर के बलिदान को नहीं भूलेगा लखनऊ
डॉक्टर शारदा की तबीयत खराब होने की वजह से एवं लंग्स में संक्रमण फैलने की वजह से उन्हें हैदराबाद के किम्स अस्पताल के लिए एअरलिफ्ट कराया गया था ।11 जुलाई को डॉक्टर शारदा को लखनऊ से हैदराबाद एयरलिफ्ट कराया गया था।
गौरतलब है कि करीब 10 दिन के बाद उन्हें कैंडेवर मिला पर ट्रांसप्लांटेशन उनकी नहीं हो पाई इसके बाद शारदा सुमन सेप्टीसीमिया से ग्रसित हो गई जिसके बाद उनका निधन हुआ।
इससे पहले डॉक्टर शारदा की प्री मैच्योर डिलीवरी करानी पड़ी
गौरतलब है कि डॉक्टर शारदा 12 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव हो गई थी ।इसके बाद प्रेगनेंसी की स्थिति में उन्हें प्रीमेच्योर डिलीवरी करानी पड़ी। डॉ शारदा का फेफड़ा बुरी तरह संक्रमित हो गया था और संक्रमण भी बढ़ता जा रहा था ।
योगी आदित्यनाथ में तुरंत की थी मदद
गौरतलब है कि आर्थिक स्थिति मजबूत ना होने की स्थिति में डॉक्टर शारदा का इलाज कराना कठिन हो रहा था ।इसके लिए मेडिकल स्टाफ की टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मदद मांगी ।मदद की गुहार सुनते ही प्रदेश के कोरोना वारियर के लिए योगी आदित्यनाथ जी ने फेफड़े को ट्रांसप्लांट करने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए तुरंत आवंटित कर दिए एवं उन्हें एअरलिफ्ट कराया।
डॉक्टर शारदा अब नहीं हैं हमारे बीच
लोहिया अस्पताल की जूनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत डॉ शारदा अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन निस्वार्थ भाव से की गई सेवा, समर्पण, बलिदान एवं सच्चा वारियर क्या होता है वह उन्होंने हमें बता दिया। डॉक्टर शारदा के असीम एवं उत्कृष्ट निस्वार्थ भाव से किए गए कार्य पर सदेव लखनऊ के साथ पूरा देश गर्व करेगा।










