
लखनऊ 8 फरवरी: भारतीय रेलवे को हाल में ही केंद्र द्वारा जारी बजट में कुल 140367 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। जहाँ विकास, सुरक्षा, ट्रैक दोहरीकरण, लूपिंग, इनटरलॉकिंग सिस्टम, प्लेटफार्म सिग्नल प्रणाली आदि को दुरुस्त करने के लिए इस बजट का प्रयोग किया जायेगा। वहीँ आने वाले तीन सालों में 400 वंदे भारत ट्रेन को चलाने जा रही है, जिस प्रोजेक्ट को धीरे धीरे शुरू किया जायेगा। वहीँ आरडीएसओ स्वदेशी टेक्नोलॉजी से 250 किमी की रफ़्तार से ट्रेन चलने की ओर कार्य करेगी।
7 करोड़ में डिजाइन और तकनीक किया जायेगा विकसित
ऐरोडोयानामिल डिजाइन और तकनीक को विकसित करने के लिए इस प्रोजेक्ट पर कुल 7 करोड़ की धनराशि आवंटित की जायेगी। जिसके लिए इस प्रोजेक्ट के तहत बजट आवंटित की जायेगी। कहाँ तकनीक और सुरक्षा मानकों को विकसित करने के लिए आधारशिला रखी जायेगी।
50 करोड़ की राशि वर्तमान प्रोजेक्ट को देगी रफ़्तार

गौरतलब है कि वर्तमान समय में RDSO द्वारा चलाई जा रही प्रोजेक्ट पर भारतीय रेलवे 50 करोड़+ रूपये आवंटित करेंगे। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद ट्रेन में लगने वाले आग के तुरंत रोकथाम के साथ ट्रेन को कुल करने के तकनीक को विकसित करना है। जिसके लिए फायर टेक्सटिंग लैब बनाये जायेगे और वियापक तरीके से मानकों का घ्यान में रखते हुए प्रणाली विकसित की जायेगी।
ट्रेन के टक्कर को रोकने के लिए कोलिजन सिस्टम को किया जायेगा विकसित
भारतीय रेलवे रेलवे के सुरक्षा को और चुस्त करने के लिए कोलिजन सिस्टम विकसित करेगी। इस परियोजना में कुल 29 करोड़ के आसापास की लागत आएगी। वहीँ कोहरे से निपटने के लिए फॉग विज़न के साथ इलेक्ट्रिक लैब इंस्टालेशन के साथ पुराने कोच जो LHB कोच में बदलने के लिए कार्य किये जायेंगे।
हाई स्पीड ट्रेन की मिल सकती है सौगात

गौरतलब है कि वंदे भारत, गतिमान एक्सप्रेस के उपरांत अब रेलवे हाई स्पीड ट्रेन चलाने की दिशा में कार्य करेगी। RDSO और खड़गपुर IIT मिलकर इस तकनीक का विकास करेगें।
लखनऊ मंडल को मिल सकती है 10 वन्दे भारत हाई स्पीड ट्रेन
लखनऊ मंडल को 10 वन्दे भारत हाई स्पीड ट्रेन की सौगात मिल सकती है। जहाँ 400 सेमी हाई स्पीड नई वंदे भारत ट्रेन को चलाने का विजन लेकर भारतीय रेलवे चल रही है। दिल्ली हावड़ा रुट पर चलाये जा रहे वंदे भारत एक्सप्रेस को लखनऊ मंडल से भी जोड़ा जा सकता है। जिससे की वाराणसी तथा लखनऊ को भी फायदा पहुँचेगेया। वहीँ पहले से ही उत्तरी और पूर्वोत्तर रेलवे में दोहरीकरण का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।









