
लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी दिव्यांशु निगम ने इतिहास रचते हुए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2020 (UPSC-2020) में 44वां स्थान प्राप्त किया। दिव्यांशु निगम ने अपनी इस उपलब्धि को अपने स्वर्गवासी पिता श्री श्याम कुमार निगम को समर्पित किया। दिव्यांशु निगम के पिता श्री श्याम कुमार निगम जी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में कार्यरत थे। वही हाल में ही दिव्यांशु के रिजल्ट आने से पूर्व कोविड-19 के दौरान हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया था।
कोविड काल में छूटा पिता का साथ
दिव्यांशु निगम ने बताया की उन्हें सबसे ज्यादा झटका तब लगा जब उनके पिता ने उनका साथ छोड़ा। वहीं परीक्षा की तैयारी के साथ वह पीजीआई के चक्कर भी लगा रहे थे। पिता के स्वर्गवासी होने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और फिर से तैयारी में जुट गए। उन्होंने खुद संकल्प लिया कि उन्हें आईएस बनकर स्वास्थ्य विभाग सेवाओं में बेहतर काम करना है।
तीसरे प्रयास में मारी बाजी

दिव्यांशु निगम ने तीसरे प्रयास में यूपीएससी क्लियर किया, वही पूछे जाने पर उन्होंने यह भी कहा की उन्हें किसी भी हाल में यूपीएससी क्लियर करना था। लेकिन अगर वह क्लियर नहीं करते पाते तो वह शिक्षण संस्थान या रिसर्च क्षेत्र में कार्य करते।
शिक्षा
दिव्यांशु निगम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर समेत अलग-अलग जगह पर पूर्ण की। वहीं उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बिट्स पिलानी में किया। जहां उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके साथ ही वह यूपीएससी की तैयारी में भी जुटे । अपने तीसरे प्रयास में दिव्यांशु निगम ने बाजी मारी।
कोविड-19 पिता की मौत

गौरतलब है कि जब दिव्यांशु निगम की जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मिली तब उनके पिता उनके साथ नहीं थे। उनके पिता उनके प्रेरणास्रोत थे, जहां उन्हीं की प्रेरणा की बदौलत वह आज इस मुकाम को हासिल कर पाए ।अब दिव्यांशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए कार्य करेंगे वही उनका यह भी कहना है कि वह शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के लिए आगे काम करना चाहेंगे।
प्रेरणा स्रोत
दिव्यांशु निगम ने बताया कि उन्हें अपने ही घर से प्रेरणा मिली है ।जहां उनके पिता खुद इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में कार्यरत थे । वहीं उनकी माता स्मिता निगम हमेशा उन्हें प्रेरणा देती है। वही उनके भाई ने भी उनको हौसला दिया जो खुद आईआरएस हैं। घर के साथ उन्होंने खुद गवर्नमेंट ऑफिस में जा कर भी चीजों का अनुभव किया है की किस तरीके का चैलेंज आता हैं और चैलेंज को इस तरीके से पूरा करना पड़ता है । दिव्यांशु ने कहा की मोटिवेशन को खुद अपने अंदर ढूंढने का प्रयास कीजिए यह कहीं भी किसी से भी मिल सकता है ।अपने आसपास पॉजिटिव लोगों के साथ रहें ।
युवाओं को दिया संदेश
दिव्यांशु निगम ने कहा कि सपने जरूर देखें, लक्ष्य पर डटे रहें तो कामयाबी जरूर मिलेगी ।वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर आपकी ग्रास्पिंग पावर अच्छी है तो रोजाना अनुशासन के साथ 8 घंटे पढ़ाई भी पर्याप्त है ।खुद के अंदर मोटिवेशन ढूंढने का प्रयास करें ।कभी-कभी निराशा जरूर होती है लेकिन उस निराशा को आशा में बदलने के लिए आपको मोटिवेशन खुद ढूंढने होगी ।









