
लखनऊ 25 सितंबर : बाराबंकी के 22 वर्षीय आदर्श ने इतिहास रच दिया है। जहां उन्होंने UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में बाराबंकी जिले का नाम रौशन कर दिया है।यूपीएससी के परिणाम घोषित होने के साथ ही बाराबंकी जिले के मयूर विहार कॉलोनी में रहने वाले आदर्श अब सब के आदर्श बन गए हैं। UPSC के रैंकिंग लिस्ट में उन्होंने 149 वां रैंक हासिल कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
बिना ट्यूशन के पहले प्रयास में नाम की उपलब्धि
UPSC में अपने पहले ही प्रयास में आदर्श ने इतिहास रचते हुए 149 वां स्थान हासिल किया। बिना किसी कोचिंग की मदद लिए खुद अपने दम पर किया यह मुकाम हासिल। 22 वर्षीय आदर्श के अनुसार उन्होंने सेल्फ स्टडी में जी जान एक कर पढ़ाई की और उसका नतीजा यह है की वह इतनी कम आयु में आईपीएस पद पर आसीन होंगे।
पिता की चाहत की किया पूरा

आदर्श के पिता का नाम श्री राधाकांत शुक्ला हैं। वह एक निजी फर्म में कार्य करते हैं और वह एक अकाउंट के पद पर आसीन हैं। उनका भी सपना था की वह UPSC में उत्तीर्ण हो, लेकिन कुछ पारिवारिक वजह से ऐसा नहीं कर पाए लेकिन उनका सपना उनके पुत्र आदर्श ने पूरा किया। जहां अपने पिता के सपने को आदर्श ने हकीकत में बदल दिया। उनके पिता राधाकांत शुक्ल और माता गीता बेहद गर्व महसूस कर रही हैं जहां छोटे से जगह से आज निकलकर उनका पुत्र बड़े ओहदे पर जा खड़ा हुआ है।
आदर्श रह चुके हैं गोल्ड मेडलिस्ट

आदर्श ने अपने इंटर कॉलेज लखपेड़ाबाग के हाई स्कूल साईं इंटर कॉलेज से किया।इसके बाद उन्होंने लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज से बीएससी में गोल्ड मेडल हासिल कर जिले का नाम रोशन किया ।इसके उपरांत उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की जहां 22 साल की उम्र में उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
आदर्श ने बताया सफलता का मंत्र
आदर्श के अनुसार मेहनत और कर गुजारनी की चाहत का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। मेहनत लगन से किया गया कार्य कभी ना कभी आपको सफलता की मंजिल तक ले जाती है। आदर्श के अनुसार उन्होंने सीमित संसाधनों में रोजाना 7 से 9 घंटे पढ़ाई में लगाते थे। नियमित टाइम टेबल के अनुसार वह पढ़ाई किया करते थे जिसके फलस्वरूप आज वह इस मुकाम हो हासिल कर पाने में सफल हुए हैं।
माता पिता को इस उपलब्धि का दिया श्रेय
आदर्श ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी माता और पिता को दिया। जहां उन्होंने यह कहा कि उनके पिता राधाकांत शुक्ल एवं माता गीता शुक्ला ने उनकी पढ़ाई के लिए पूरा सपोर्ट किया, कभी कमी नहीं आने दी और हमेशा उन्हें बढ़ावा देते रहे। आदर्श आज खुश है कि उन्होंने अपने पिता का सपना साकार किया।









