लखनऊ: लखनऊ का गोमती रिवर फ्रंट इस बार अपनी खूबसूरती की वजह से नहीं बल्कि घोटाले की वजह से सुर्खियां बटोर रहा है। गौरतलब है कि सीबीआई ने गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट में लगभग 407 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया है।
इस संदर्भ में सीबीआई ने कुल 40 जगह पर छापे भी मारे हैं सीबीआई ने 16 इंजीनियरों समेत 189 के के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज किया है।
16 इंजीनियरों समेत 189 लोगों के खिलाफ एफआईआर
गौरतलब है कि सीबीआई ने 16 इंजीनियरों समेत 189 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है ।वहीं छापेमारी के समय दो अधीक्षक अभियंताओं के के अधीक्षक अभियंताओं के घर से ₹500000 लाख रुपए भी बरामद किए गए हैं।इसके साथ बड़ी संख्या में कीमती सामान ,दस्तावेज ,प्रॉपर्टी में निवेश के कागजात भी मिले हैं ।
अनियमितता की वजह से संदेह
इस मामले में सीबीआई ने रिटायर्ड अधीक्षक अभियंता रूप सिंह यादव व क्लर्क राजकुमार यादव को भी गिरफ्त में ले लिया है। गौरतलब है कि रिवरफ्रंट में हुए में हुए काम को दो हिस्सों में विभाजित कर पैसों की जांच की जा रही है। सीबीआई 12 कामों के लिए आवंटित 1031करोड़ व दूसरी 661 कामों के लिए लिए गए 661 करोड़ रुपए की जाँच कर रही है जिसमें कामों में अनियमितता की वजह से संदेह गहराया जा रहा है।
गड़बड़ियों पर एक नज़र
- गोमती रिवर फ्रंट में अचानक से बजट का बढ़ा दिया जाना।
- एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट ना लेना ।
- गोमती नदी की सफाई की जगह सुंदरता को तरजीह देना।
- प्रोजेक्ट के सिलसिले में कई विदेश यात्रा।
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500 करोड़ 1427 करोड़ 2500 करोड़ सबसे पहले तय लागत तीन साल में तिगुना हुई लगत नया प्रस्ताव पारित हुआ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने 1 अप्रैल 2017 को रिवरफ्रंट घोटाले की जांच करने के लिए जस्टिस आलोक सिंह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया ।
समिति ने 45 दिन में के बाद 16 मई को अपनी रिपोर्ट दर्ज की दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई की जाए, इसके लिए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को जिम्मेदारी सौंपी गई है। 20 जुलाई 2017 को केस को सीबीऑई को सौंपने की सिफारिश ले बाद 30 नवंबर से सीबीआई ने तफ्तीश शुरू की ।










