लखनऊ 9 सितंबर : थप्पडबाज लड़की के वीडियो वायरल होने के बाद अदब का शहर कहा जाने वाला लखनऊ पीड़ा में नजर आ रहा है। 30 जुलाई को अवध क्रॉसिंग पर घटित वाक्या को याद कर लखनऊवासियों का दिल पीड़ा से भर उठता है। जेहन में आता हैं तो केवल एक सवाल आखिर क्यों? क्या पुरुषों के कोई अधिकार समाज में नहीं है? क्या नारी हमेशा पड़ेगी पुरुषों पर बेबुनियाद चीजों पर भारी?
अवध क्रॉसिंग पर दो संदेशों के साथ बैनर के साथ नजर आए पुरुष वर्ग
लखनऊ के बाद क्रॉसिंग में जगाया मामला हुआ था वहां पर कुछ लोग एकत्रित होकर अपने संदेश को बैनर के जरिए कहते सुने गए।
जहां उन्होंने पुरुष के सम्मान की बात की उनके हक की लड़ाई की बात की, उन्होंने नारा लगाया “पुरुष का सम्मान बचाओ, लिंग भेद कानून मिटाओ,” पुरुष के विरुद्ध हुए अत्याचार के खिलाफ पीड़ा से भरी हुई आवाज सामने आई है जहां पुरुष वर्ग अपने हक की लड़ाई अपने स्वाभिमान की लड़ाई अपने आत्मसम्मान की गुहार लगाता नजर आ रहा है। लिंग भेद कानून पर भी कटाक्ष किया है।
बराबरी का हक सभी को
जिस तरीके से लखनऊ के लोग एक साथ होकर ट्विटर द्वारा पीड़ित कैब ड्राइवर की आवाज बन कर सामने आए वहीं कहीं ना कहीं ये उन लोगों पर भी सवाल उठता है जो मूक दर्शक की भांति उस समय पीड़ित कैब ड्राइवर को पीटता हुआ देख रहे थे। हमें अपनी सोच में बदलाव की जरूरत है। इज्जत , स्वाभिमान पुरुष और नारी दोनो का होना चाहिए। नारी होना ही ये नहीं सिद्ध कर देता की सम्मान की वो पहले से ही अधिकारी है चाहे वह इसके एवज में कुछ भी मनमानी हरकत करें।
अदब और संस्कार के शहर को दागदार ना होने दें
सभी प्रदेश वासियों से निवेदन है की कानून को हाथ में ना लें । कानून सभी का मौलिक अधिकार है। गलत तरीके से उसका दुरुपयोग बिलकुल भी ना करें। ये प्रदेश नारी की भी इतनी ही इज्जत करें जितना पुरुष की। मासूम निर्दोष लोगों पर अत्याचार उनके सम्मान को तार तार करने का हक ना इस संविधान ने नहीं दिया है। महिला और पुरुष दोनों के लिए कानून की परिभाषा एक है।










