
यूपी के कई जनपद डेंगू और वायरल के चपेट में है। जहां आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ने से प्रदेश में दहशत का माहौल है। गौरतलब है की प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी डेंगू से मरने वाले लोगों का आंकड़ा अब 20 पार कर गया है। ऐसे में यूपी के कन्नौज जिले में एक ऐसी मछली की प्रजाति को पाला जा रही है जो की नदी नालें तालाबों और रुके हुए पानी में से डेंगू के लार्वा को खाकर नष्ट कर देती है।
यूपी के कन्नौज में डाली जा रहीं हैं गंबूसिया प्रजाति की मछली
गौरतलब है की यूपी के कन्नौज जिले में तालाबों पोखरों एवम नेहरों में गंबुसिया मछली को डाला जा रहा है जिससे की पानी में पनप रहे डेंगू और मलेरिया के मच्छर के लार्वा को ये मछलियां पलक झपकते खा जाती हैं।
बदायू से मंगवाई जा रहीं हैं मछली

कन्नौज के जिलाधिकारी राकेश मिश्रा जी के अनुसार गंबूसिया मछली को बदायू से मंगवाकर तालाबों को चिन्हित कर डलवाया जा रहा है। जिससे की पानी में पनप रहे लार्वा का खात्मा हो सके। राकेश मिश्रा के अनुसार फॉगिंग, पानी में क्लोरीन की गोलियां देने के बाद भी हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं जिससे डेंगू पर काबू पाया जा सके। इसके तहत पानी में गंबूसिया मछली छोड़ी जा रहीं हैं।
कहां की होती हैं गंबूसिया मछली
गौरतलब है की ये मछलियां पश्चिम बंगाल में पाई जाती हैं। जहां आमतौर पर इन्हें मच्छर मछली बोलते हैं। बड़ी तादात के लिए बाकी प्रदेशों को कोलकाता पर निर्भर रहना होता है।
उत्तर प्रदेश में नहीं पाई जाती ये मछलियां
एनके अग्रवाल जोकि मत्स्य विभाग में सहायक निदेशक है उनके अनुसार गब्बू सिया मछली उत्तर भारत में नहीं पाई जाती हैं इसके लिए पश्चिम बंगाल पर निर्भर रहना पड़ता है। गौरतलब है कि जापानी में भी इस मछली के इस्तेमाल से रुके पानी में जहां मच्छर प्रजनन करते हैं वहां इस प्रजाति की मछली बेहद असरदायक है। गंबूसिया मछली संख्या से मच्छरों की संख्या पर जैविक विधि से रोक लगाती है।
कितने में मिलती हैं यह मछली
इस लाभकारी मछली की सरकारी रेट 2 रुपए प्रति पिस है। गौरतलब है की एक पैकेट में 200 गंबूसिया मछली आती हैं। कानपुर की फिशरी विभाग की कुसुमा पाल के अनुसार डेंगू मच्छर का खात्मा करने के लिए गंबूसिया बेहद अच्छा विकल्प है।









