
लखनऊ 19 अगस्त: राजधानी लखनऊ में विधानसभा सत्र में कुल 15 विधेयक को कानून में तब्दील कर दिया गया, जिसकी मंजूरी विधान परिषद से पास होने के बाद राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। जिसमें यूपी नगरिय परिसर किराएदार विधिनियम विधायक 2021 को विधानसभा से पास होने के बाद राज्यपाल ने मंजूरी देकर कानून में तब्दील कर दिया है। जिसके तहत अब बिना रेंट एग्रीमेंट (Rent Aggrement) तथा कॉन्ट्रैक्ट के कोई भी मकान मालिक किसी भी किराएदार को नहीं रख पाएगा ।इतना ही नहीं राजधानी लखनऊ में चल रहे मनमाने तरीके से किराया वसूलने वाले मकान मालिकों की भी नकेल कसने के लिए अब नियम के अनुसार मनमाने तरीके से किराएदार से किराया नहीं वसूल पाएंगे।
राजधानी लखनऊ समेत यूपी में किराएदार और मकान मालिक के विवादों में आएगी कमी

गौरतलब है कि इस विधिनियम अध्यादेश को कानून बनने के बाद अब एग्रीमेंट के बिना कोई भी मकान मालिक किराएदार को अपने घर पर नहीं रख पाएंगे ।वहीं एग्रीमेंट 11 महीने से शुरू होगी । मनमानी तरीके से मकान मालिक द्वारा किराए भी नहीं बढ़ा जा सकेगा। जहाँ एग्रीमेंट में यह साफ लिखा होगा की कितने प्रतिशत किराया एग्रीमेंट वर्ष के अंत में बढ़ाया जायेगा। वही इस कानून के पास होने के साथ ही किरायादारी संबंधित जुड़े विवादों में भी कमी आएगी जहां सब चीज कानून के तहत किया जाएगा।
मकान मालिक और किराएदार दोनों के हित रहेंगे संरक्षित
गौरतलब है कि यूपी नगरिया परिसर किराएदार विधिनियम विधेयक के कानून बनने के बाद अब मकान मालिक और किराएदार दोनों के हित संरक्षित रहेंगे। जहां दोनों रेंट एग्रीमेंट के तहत कार्य करेंगे।
यूपी अधिनियम 1972 खत्म उसकी जगह आया नया कानून

प्रदेश के कई शहरों में मकान एवं भवन किराए देने को लेकर उठे विवादों के निस्तारण में कठिनाई देखी जा रही थी ।जहां एक निश्चित एग्रीमेंट ना होने की वजह से यह सब कठिनाइयों से किराएदार के साथ-साथ मकान मालिक भी गुजर रहते थे। वही इन सब घटनाओं को देखते हुए वर्तमान समय में अधिनियम 1972 को खत्म करते हुए उसकी जगह पर नया कानून लेकर आया गया है। गौरतलब है कि 9 जनवरी 2021 को विधायक को सामने लाया गया था ।
मकान और रेंट संबंधी कंप्लेंट को रेट अथॉरिटी ऑफ ट्रिब्यूनल देखेगी

राजधानी लखनऊ समेत यूपी में इस कानून को पास कर दिया गया है। जहां कोई भी रेंट एग्रीमेंट आदि से संबंधित कंप्लेन या शिकायत को रेट अथॉरिटी ऑफ ट्रिब्यूनल देखेगी।
रेंट एग्रीमेंट
किरायदार और माकन मालिक दोनों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और स्थाई पता को एग्रीमेंट में दर्ज किया जाता है जहाँ स्टाम्प पेपर पर रेंट एग्रीमेंट तैयार किया जाता है । जिसमें दोनों पक्षों के बायोमेट्रिक के साथ एक वकील और गवाह के भी साइन भी लिए जाते हैं । इसके उपरांत पुलिस वेरफिकेशन भी करवाया जाता है ।









