
लखनऊ : कोशिश करने वालो की हार नहीं होती। यह कहावत हकीकत कर के दिखाया है लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow university) की पूर्व छात्रा प्रतीक्षा सिंह ने। हाल में ही UPSC रिजल्ट की घोषणा हुई जहाँ प्रतीक्षा सिंह ने 662 रैंक लाकर लखनऊ यूनिवर्सिटी का नाम रौशन किया।
प्रतीक्षा सिंह (UPSC topper Pratiksha Singh) मूल रूप से गौंदलमऊ विकासखंड के इस्लामगंज की हैं, यहीं इनका जन्म हुआ । मुसीबत, संकट, संघर्ष, कठिन समय, बुरा वक्त इन सब चीजों पर विजय पाई प्रतीक्षा सिंह ने। यूपीएससी परीक्षा में लगभग 10 लाख लोग प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं और उनमें से महज 1000 लोग ही आखिर में अपनी जगह बना पाते हैं। उनमें से एक हैं होनहार प्रतीक्षा सिंह । 662 वां स्थान प्राप्त कर उन्होंने अपनी मां गुड्डी सिंह का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
छोटी उम्र में पिता ने छोड़ा था साथ

जब प्रतीक्षा दो वर्ष की थी तो उनके पिता का निधन हो गया। घर समेत सारी जिम्मेदारी प्रतीक्षा की माता जी गुड्डी सिंह पर गई। आर्थिक तंगी कठिन दौरसे गुजरकर भी इस मां ने प्रतीक्षा को उस मुकाम पर पहुंचाया जिसकी कल्पना करना बेहद मुश्किल है।
पिता के मौत के बाद प्रतीक्षा और उनकी माता गुड्डी सिंह जी अपने ननिहाल आ गई। जहां प्रतीक्षा की माता ने एक निजी स्कूल में बड़े कम वेतन में काम करती रहती और अपनी बेटी को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करती रहीं। गुड्डी सिंह ने नवोदय विद्यालय में बतौर वार्डन का भी कार्य किया। जिससे उनकी बेटी को वह हर कुछ दें पाए जिससे यूपीएससी की तैयारी में उन्हें मदद दें पाए।
प्रतीक्षा सिंह की शिक्षा
प्रतीक्षा सिंह ने एमटी यूनिवर्सिटी से पहले इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, इसके उपरांत उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए पॉलिटिकल साइंस में पूरा किया । सफलता का मूल मंत्र उन्होंने सच्ची लगन और अनुशासन के साथ मेहनत को बताया।
पहले दो प्रयास में हुई विफल
अगर जिद्द है तो आप कुछ भी कर सकते हैं बार बार विफलताओं के बाद भी उठकर खड़े होना और लक्ष्य को प्राप्त करना किसी को सीखना है तो उसकी उदाहरण हैं प्रतीक्षा सिंह और उनकी मां गुड्डी सिंह। लाख मुसीबतों के बाद भी प्रतीक्षा ने तीसरे प्रयास में 662 रैंक लाकर इतिहास रच दिया।
मां को दिया श्रेय
प्रतीक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया जहां उन्होंने यह कहा की मां वो ताकत है। जिन्होंने मुझे कभी भी हारने नहीं दिया ।यह सफलता में उन्हें समर्पित करती हूं। देश के साथ मैं मां की सेवा करूँ यही मेरा अब एक मात्र मिशन है।









