लखनऊ 12 अक्टूबर: राजधानी लखनऊ के मोती महल लॉन में 18 में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का समापन हो चुका है। गौरतलब है कि मेले में काफी लोगों ने सम्मिलित होकर इस 18 में राष्ट्रीय पुस्तक मेले को सफल बनाया ।यही नहीं मेले में कई हस्तियों को सम्मानित किया गया वहीं कई प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। मेले में लखनऊ वासियों ने कुल 86 लाख की किताबें खरीदकर अलग रिकॉर्ड भी बना दिया । लेकिन आखिर कौन सी किताबों की हुई सर्वाधिक बिक्री जानिए आगे ।
18 राष्ट्रीय पुस्तक मेले के आखिरी दिन बीके सर्वाधिक पुस्तकें

राजधानी लखनऊ में 1 अक्टूबर से शुरू हुए 98 राष्ट्रीय पुस्तक मेले का अंत हो चुका है लेकिन बेहतरीन किताबें के साथ भवन विभिन्न आयोजन यादें लोगों के दिल में अभी भी ताजा गौरतलब है कि मोती महल लॉन में हुए पुस्तक मेले के आखिरी दिन लगभग 25% से अधिक किताबें अकेले आखरी दिन में बिकी। अपने आप में रिकॉर्ड है।
मेले के सह संयोजक आस्था व संयोजक मनोज चंदेल का बयान

मोती महल लॉन में 18 में राष्ट्रीय पुस्तक मेले के संयोजक श्री मनोज चंदेल व सह संयोजक आस्था ढल ने मेले में लगभग 8600000 रुपए के कारोबार होने का आंकड़ा बताया वहीं उन्होंने यह भी साझा किया कि 80 से 90 फ़ीसदी लोग खास किताबों के लिए ही पुस्तक मेले में आए । जहां लखनऊ वासियों को इस साल पुस्तक मेला काफी पसंद आया एवं पिछले कुछ सालों से अधिक बिक्री एवं लोगों का रुझान किताबों में देखा गया।
पुस्तक मेला में इस साल सर्वाधिक विकी यह किताबें
गौरतलब है कि बच्चों की किताबें इस साल सर्वाधिक बिकीं ।वही हिंदी साहित्य एवं हिंद हिंदी लेखकों द्वारा प्रकाशित किए गए किताबों के वी जमकर बिक्री हुई। इस वर्ष लोगों का रुझान हिंदी किताबों पर ज्यादा देखा गया।

जहां अंग्रेजी एवं अन्य भाषा के किताबों में से हिंदी ने बाजी जीती।
साहित्य पाठन प्रतियोगिताओं में युवाओं का दिखा उत्साह
आजादी के अमृत महोत्सव तर्ज पर आयोजित 18वीं राष्ट्रीय मेले में उपन्यास कविताएं कथा की कई किताबों को खूब सराहा गया ।जहां पर प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, भारतीय, निराला, कृष्ण चंद्र, शरद चंद, माहेश्वरी वर्मा, कमलेश्वर जैसे अनगिनत लोकप्रिय साहित्यकारों की किताबों की खूब मांग हुई ।वहीं लोगों ने बढ़ चढ़कर इन विश्व प्रख्यात लेखकों की किताबों को खरीदा।
क्या रहा खास

राना प्रताप मार्ग मोती महल लॉन में हाल में ही खत्म हुए 18 मे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में कई कार्यक्रम हुए जहां किताब के विमोचन से लेकर चर्चाएं नुक्कड़, नाटक, पेंटिंग आदि अनेक कार्यक्रम मोती महल लॉन में आयोजित हुए। कई विभिन्न फाउंडेशन ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जहां विश्वम फाउंडेशन के युवा बच्चों ने पर्यावरण, देशभक्ति पर नाट्य नृत्य आदि प्रस्तुत किए ।ज्योति किरण रतन के संयोजन में आजादी का अमृत महोत्सव ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लेकर उत्साह दिखाया।
अगले साल फिर आने का वादा कर समाप्त हुआ पुस्तक मेला
आखिरकार वो घड़ी आ गई जब लखनऊ वासियों ने पुस्तक मेला को अलविदा कहा एवं अगले वर्ष पुनः इसी समय में आयोजित करने की मांग भी कर डाली। लखनऊ में पुस्तक प्रेमियों को देखते हुए एक बार फिर से अगले वर्ष पुस्तक मेला का आयोजन करवाया जाएगा।










