
लखनऊ के कैब ड्राइवर (Cab Driver)सहादत अली (Sahadat Ali) के केस में नया मोड़ आ गया है। जहां अब बार-बार सुनवाई की तारीख बदली जा रहीं है। तारीख पे तारीख डायलॉग हमनें फिल्मों में ही सुनी है लेकिन अब इसकी सार्थकता हमें वास्तविक जीवन में भी देखने मिल रहा है। अब क्रमबद्ध तरीके से जानते हैं कि सहादत अली केस में क्या नया मोड़ आया है।
18 सितंबर को होनी थी सुनवाई
कृष्णानगर थाना क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक महेश कुमार, उप निरीक्षक हरेंद्र सिंह, मन्नान और तीन अज्ञात सिपाहियों के विरुद्ध पीड़ित कैब ड्राइवर ने धारा 190 के तहत अर्जी दी थी, जिसमें रिश्वत का मामला था, जिसकी सुनवाई 18 सितंबर को रखी गई थी। लेकिन कोर्ट में पुलिस द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए जाने की वजह से अब यह सुनवाई टाल दी गई है। अब उन्हें 29 सितंबर की डेट दी गई है।
सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग
यह सब देखते हुए कैब ड्राइवर सहादत अली ने सीबीआई जांच की मांग की है ।जहां उन्होंने आरोपी प्रियदर्शनी के खिलाफ यह अपील की है एक बार उनकी विवेचना पुनः करवाई जाए और जिन धाराओं को हटाया गया हैं उनकी जांच हो और उनपर वो धाराएं लगाई जाएं। उनके साथ इंसाफ हो। गरीब की मदद की जाए।
प्रियदर्शनी पर लगी हैं यह धाराएं

प्रियदर्शनी पर धारा 323, 506, 504, 427 लगाई गई हैं।
लगाई मदद की गुहार

सहदात अली ने कहा की 30 जुलाई के बाद वह आज तक काम के अभाव में अपना जीवन किस प्रकार व्यतीत कर रहें हैं वह एवं उनका परिवार ही जानता है । ना उनके पास गाड़ी है ना उनके पास कोई काम ।बचे पैसे भी धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। बच्चे की फीस भरने के लिए पैसे नहीं रहे। उन्होंने जनता से अपील की है कि उन्हें मदद की जाए, लखनऊ वासियों ने उनकी काफी मदद की है सच की लड़ाई में वहीं उनकी अपील है की उन्हें कोई भी गाड़ी चलाने दे जिससे उनकी और उनके परिवार की मदद हों पाए।
चारबाग के केस की दिया हवाला
गौरतलब है की चारबाग में महिला पर हाथ उठने पर तुरंत पुलिस ने कार्यवाही कर के इंसाफ किया । वहीं पुलिस दोहरा चरित्र क्यों अपना रही है? यह उनके समझ से बाहर है। उन्होंने यह भी कहा कि वह योगी जी और मोदी जी सरकार से आग्रह करते हैं कि उन्हें इंसाफ दिलाया जाए, जिसके वह हकदार है ।शुरू से ही सहादत अली सम्मान के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं ,जिसमें पूरे लखनऊ और पूरे भारत ने उनका सपोर्ट मिला । आशा करते हैं आने वाले समय में सहादत अली को व न्याय मिले जिसके वह हकदार है।









