उत्तरप्रदेश की योगी सरकार किसी भी भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति की तहत कार्य करती नजर आ रही है। जहां किसी भी नाजायज चीजों पर योगी सरकार का चाबुक पूरी तरह से चलता नजर आ रहा है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की नीति ठीक तरीके से चलती रहे इसलिए भ्रष्टाचार को लेकर योगी सरकार बेहद सजग एवं संवेदनशील है इसी के तहत विवादित इंजीनियर अरुण मिश्रा को अब जबरन रिटायरमेंट दिलवाया गया। योगी सरकार हर चीज़ों में अपनी पैनी नज़र बनाई हुई है ।
इंजीनियर अरुण मिश्रा लखनऊ के जेल में है बंद
भ्रष्टाचार के आरोप में विवादित इंजीनियर अरुण मिश्रा यूपीएसआईडी के प्रबुद्ध प्रभारी रहे है ।अरुण मिश्रा को भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद जबरन रिटायरमेंट दिलवाया गया। योगी सरकार ने अरुण मिश्रा के विरुद्ध सख्त सख्त कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं ।गौरतलब है कि इंजीनियर अरुण मिश्रा गोरखपुर इंडस्ट्रियल अथॉरिटी में महाप्रबंधक की भूमिका में कार्यरत है। वहां इनकी पकड़ बेहद मजबूत थी ।
विवादों से पुराना नाता
अरुण मिश्रा कई बार अपने जॉब से निलंबित होने का स्वाद चख चुके हैं।
- हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट के मामले में अगस्त 2014 में हाईकोर्ट के आदेश पर बर्खास्त कर दिया गया था।
- अरुण मिश्रा पर ट्रोनिका सीटी औद्योगिक क्षेत्र जो की गाज़ियाबाद में गई वहां ठेकेदारों को गलत तरीके से अपने मर्जी से 22 करोड़ रुपये का आवंटित करने का आरोप लगा था ।
- भू उपयोग परिवर्तन को बिना किये टाउनशिप का प्लान बनाकर आवंटित कर दिए दिए थे करोड़ो रुपए । जिसकी वजह से उन्हें ससपेंड किया गया था ।
कार्यवाही शुरू
औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने अरुण मिश्रा के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश के साथ कार्रवाई शुरू भी कर दी है। जिसके तहत उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया गया। औद्योगिक विकास विभाग के सचिव गोठवाल ने इसका आदेश जारी किया। इसका सीधा अर्थ यह की यूपी की योगी सरकार किसी तरह का खलल कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले पर बर्दास्त नहीं करती दिख रही। जातिवाद से ऊपर उठकर योगी सरकार विकाश के पथ पर उत्तरप्रदेश को ले जाने का हर संभव और यथोचित कार्य करती दिखाई दे रही है।










