उत्तर प्रदेश के आगरा में रहने वाली हिमानी बुंदेला ने इतिहास रच दिया है ।दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने जिस दृढ़ संकल्प से ना केवल केबीसी-13 में सवालों के जवाब बड़ी शानदार अंदाज में दिए हैं ।वहीं असल जिंदगी में भी उन्होंने हर मोड़ पर कठिन सवालों के बखूबी के साथ जवाब देकर बाधाएं पार की हैं। जहां वह कौन बनेगा करोड़पति सीजन 13 की पहली करोड़पति बनने का गौरव हासिल किया। आपको बता दें कि हिमानी बुंदेला पेशे से अध्यापिका है। उन्हें जीत के बाद योगी आदित्यनाथ जी ने सरहाया है।
जीत के बाद योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा जानिए
केबीसी-13 में करोड़पति का पुरस्कार जीतने के बाद हिमानी बुंदेला को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेत्रहीनता को उन्होंने मार्ग में बाधक नहीं बनने दिया। वहीं उन्होंने परिश्रम प्रतिभा एवं दृढ़ संकल्प के साथ केबीसी 13 में पहली करोड़पति बन कर देश के साथ प्रदेश का ही मान बढ़ाया है एवं प्रदेश को गौरवान्वित किया है ।उनकी यह प्रेरणादायक स्टोरी युवाओं को कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देगी।
हिमानी बुंदेला की दिल को छू लेने वाली कहानी

हिमानी बुंदेला की कहानी एक ऐसी महिला की कहानी है जिन्होंने दृढ़ संकल्प परिश्रम लगन एवं सच्ची मेहनत से खुद को इस मुकाम पर लेकर गई कहां अच्छे अच्छे लोग नहीं जा पाते हैं।
30 तारीख को देखिए हिमानी के करोड़पति बनाने का सफर

गौरतलब है की हिमानी बुंदेला आगरा से हैं वहीं पेशे से वह अध्यापिका हैं। हिमानी बुंदेला के करोड़पति बनने का एपिसोड 30 अगस्त को सोनी चैनल पर लाइव प्रसारित किया जाएगा । गौरतलब है की हिमानी ने 15 साल की उम्र में हादसे में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी ।
लेकिन उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा बल्कि अपने इस कमी को अपनी मजबूती बना ली। उसके बावजूद अपने हौसले व मजबूत इरादों के बदौलत उन्होंने पहले पढ़ाई पूरी करके अध्यापिका बनी वही नहीं सच्ची लगन और सामान्य ज्ञान के शानदार पकड़ ने आज उन्हे केबीसी में करोड़पति बना दिया।
21 साल पुराना सपना हुआ सच
गौरतलब है की हिमानी जब 7 वर्षीय थी तब से केबीसी से उनका लगाव था ।वहीं वह पिछले चार केबीसी में आने के लिए तत्परता से कोशिश कर रहीं थी। वहीं उनका सपना इस तरह से पूरा होगा किसी ने इसकी कल्पना नहीं की होगी।
बिना आंखों की रोशनी के उन्हों अपनी निजी जीवन में पढ़ाई कर अध्यापिका बनी और फिर लगन से केबीसी में करोड़ पति बनी यह अपने में एक बड़ी मिशाल है। हमें गर्व है अपनी बेटियों पर। जिन्होंने अपनी अलग मिशाल और पहचान से छाप छोड़ी। वह आज करोड़ों लोगों के लिए मिसाल हैं।










