यूपी के दो भाइयों ने पायलट बन किया पिता का नाम रौशन, कर्ज और उधार में डूबकर भी पिता ने नहीं टूटने दिया सपना

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यूपी के दो भाइयों ने पायलट बन किया पिता का नाम रौशन, कर्ज और उधार में डूबकर भी पिता ने नहीं टूटने दिया सपना

लखनऊ 19 सितम्बर: मेहनत, लगन, जज्बा और जूनून की सच्ची मिशाल पेश की यूपी के एक छोटे से गांव में रहने वाले दो भाइयों ने जिनका सपना था ऊंचाइयों पर उड़ना और उसको पंख दिया उनके पिता ने। आर्थिक स्तिथि अच्छी ना होने के बाबजूद पिता ने पुत्र पर भरोसा जताया और बेटे ने भी पिता को निराश नहीं किया । मेहनत रंग लाई और बेटों ने पायलट बन अपने पिता को गौरवान्वित किया। आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के बावजूद पिता ने अपने पुत्र को पायलट बनाने के लिए उनके सपनों को टूटने नहीं दिया और दोनों पुत्रों को शिक्षा दिलवाई।

महेंद्र और धीरेंद्र यादव की कहानी

उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव से आने वाले महेंद्र यादव सुरेंद्र यादव पायलट बनना चाहते थे। वही उनके पिता लाल बहादुर यादव जी अपने बच्चों को आसमान में ऊंची उड़ान भरते हुए देखना चाहते थे। आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के बावजूद अपने पुत्र के लिए लाल बहादुर यादव ने सर्वस्व निछावर किया । जिसकी आगे आने वाले समय में मिसाल दी जाएगी। गौरतलब है कि अपने पुत्रों को पायलट बनाने के लिए लाल बहादुर यादव ने बैंक से लोन लिया वही पैसे कम पड़ने की स्तिथि में अपने रिश्तेदारों से भी उधार मांगे ।उधार में डूबने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों का सपना पूरा किया।

महिंद्रा धीरेंद्र में रखी पिता की लाज

महिंद्रा धीरेंद्र के साथ उनके पिता लाल बहादुर यादव का भी सपना जुड़ा हुआ था ।वही इन दोनों बेटों ने अपने पिता और अपने सपनों को टूटने नहीं दिया बल्कि मेहनत, लगन एवं सच्ची निष्ठा से पढ़ाई करते हुए उन्होंने दिन रात मेहनत की जहां उन्होंने ऑल इंडिया पायलट प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक से उत्तीर्ण हुए। इस परीक्षा में लाल बहादुर यादव के पुत्र महेंद्र यादव ने पहला स्थान वही धीरेंद्र यादव ने पांचवां स्थान हासिल कर पिता को गौरवान्वित किया।

दोनों भाइयों ने भरी पहली उड़ान

Two brothers of UP became pilots, made father's name bright, even after drowning in debt and debt, father did not let the dream break
यूपी के दो भाइयों ने पायलट बन किया पिता का नाम रौशन, कर्ज और उधार में डूबकर भी पिता ने नहीं टूटने दिया सपना

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी स्ष्ट्रीय उड़ान अकैडमी में दोनों भाई का दाखिला हुआ एवं उन्होंने वहां अपनी ट्रेनिंग पूरी कि। साल 2019 में दोनों भाइयों ने बतौर ट्रेनी प्लेन उड़ाया। बतौर ट्रेनी पायलट दोनों भाई ने 100 घंटे से अधिक की फ्लाइट चलाई ।अपने दोनों बच्चों को फ्लाइट उड़ाता देखकर उनके पिता लाल बहादुर जी का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ ।वहीं उन्हें अपने बेटे पर गर्व है ।महेंद्र यादव धीरेंद्र यादव कि कहानी अपने आप में एक मिसाल है, जहां दोनों भाइयों ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता लाल बहादुर यादव को दिया उनके अनुसार उनके पिता ने जो मेहनत किया वह उनके मेहनत से कहीं अधिक है, जो भरोसा जो जज्बा उन्होंने दिखाया है वह बेहद सराहनीय है। ऐसे पिता और पुत्र को नमन ।

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