भारत में फांसी की सजा पाने वाली पहली महिला बनेगी शबनम? 2 कातिल और 7 कत्ल की जानिए खौफनाक कहानी

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Jagran

अमरोहा के बावन खेड़ी गांव में रहने वाली शबनम की कहानी कोई पिक्चर से कम नहीं है। शबनम की फांसी की तारीख की बात करने से पहले हम यह जान लेते हैं कि 14 अप्रैल 2008 यानी कि 13 साल पहले शबनम ने अपने आशिक सलीम के साथ मिलकर क्या खौफनाक कांड किया था.

शबनम का पढ़ा लिखा परिवार

शबनम के पिता कॉलेज लेक्चरर थे ।वही उसका एक भाई एमबीए का दूसरा भाई इंजीनियर था शबनम घर के सबसे बड़ी थी एवं शबनम ने डबल एमए कर रखा था।

घर में पड़ी थी 7 लाशें

यह कहानी 14 अप्रैल 2008 की है जब रात में शबनम के घर उनके पिता शौकत, उनकी मां उनके दो भाई एक बहू और दो बच्चों की लाश घर में मिली थी ।जहां शबनम और 11 महीने का बच्चा छोड़कर सभी लोगों का गला कटा हुआ था तथा जमीन पर खून गिरा पड़ा था।

जब मायावती को आना पड़ा था शबनम से मिलने

इस समाचार से अमरोहा ही नहीं बल्कि पूरा देश थर्रा उठा। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती थी ।चौथे पर्दाफाश के बाद बावन खेड़ी गांव में इस सामूहिक हत्याकांड के खिलाफ लोगों में जबरदस्त रोष था । रोष इतना था कि उस समय की तत्कालीन मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती को तुरंत आना पड़ा दूसरी ओर प्रशासन एवं पुलिस भारी दबाव में थे ।इस केस को जल्द से जल्द सुलझाने की दरकार थी इसी बीच अमरोहा में नए पुलिस अफसर आरपी गुप्ता को बावन खेड़ी बुलाना पड़ा।

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मामला तब संगीन हुए जब आरपी गुप्ता ने  मुखबीर  के जरिए यह पता लगाया की शबनम किसी सलीम नाम नामक युवक को जानती है। जिसके साथ उनका आना जाना है ।पहले सलीम से पुलिस ने पूछताछ की जब सलीम से कड़े रुख करते हुए पूछताछ की गई तो सलीम ने पूरी कहानी बयान कर दी ।

कहानी सुनते ही पुलिस के पांव से जमीन खिसक गई

कहानी सुनने के साथी कक्ष में मौजूद पुलिस अफसरों के पांव से जमीन खिसक गई ।उस रात का सच दिल दहलाने एवं थर्रा देने वाला था ।सलीम ने यह कबूल किया कि वह शबनम  से प्यार करता था और उसने कुल्हाड़ी की मदद से शबनम के साथ मिलकर 7 लोगों की हत्या की।

शबनम को किया गया पुलिस स्टेशन तलब

इस बार शबनम को बतौर पीड़ित नहीं बल्कि बतौर आरोपी आरपी गुप्ता ने पूछताछ के लिए बुलाया ।पहले चरण में आनाकानी करने लगी लेकिन उसके बाद वह भी टूट गई उसने कबूल किया कि वह सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार को मारने की साजिश में पूरी साझेदार थी  ।

शबनम ने कबूला गुनाह

पुलिस के पूछने पर उसने यह भी कबूला कि सारी जायदाद उनकी हो जाए इसलिए उन्होंने सब का कत्ल किया इसके बाद इस दिल दहलाने वाले केस की गुत्थी सुलझी ।

फांसी की सजा

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3 अगस्त 2010 में अमरोहा की अदालत ने शबनम और सलीम को मुजरिम करार देते हुए फांसी की सजा सुना दी गई । । इसके बाद 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा राष्ट्रपति तक ने याचिका खारिज कर दी।  शबनम ने पुनर्विचार याचिका उसे कोई फायदा नहीं हुआ।

बच्चे की वजह से बच सकती हैं शबनम ( आखिरी उम्मीद  )

शबनम सजा पाने से पहले गर्भवती थी। उसने जेल में ही अपने बच्चे को जन्म दिया ।गौरतलब है की शबनम बरेली की जेल में बंद है ।वही सलीम एवं शबनम दोनों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है ।शबनम की वकील शहर नकवी  कोशिश कर रहीं हैं की शबनम की सजा फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो ।

क्या रखी गयी है दलील

कोर्ट में अपनी दलील में यह भी रखा कि उनका एक बच्चा है अगर उनकी मृत्यु फांसी लगने से हुई तो उस बच्चे पर दिमागी असर पड़ेगा एवं उसे समाज हमेशा इस चीज के लिए कोसेगा । इसके साथ ही उन्होंने यह भी दलील दी कि आजाद भारत में इतिहास में पहली बार होगा कि अगर किसी महिला को फांसी लगाई जाएगी ।इससे पूरे विश्व में जो इज्जत भारत में महिला की है उसकी वह धूमिल होगी। देखना दिलचस्प होगा क्या है कोर्ट सात खून माफ कर शबनम को फांसी की सजा को बदलकर उम्र कैद की सजा में तब्दील कर पाता है या नहीं।

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