
लोहिया अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट के पद पर तैनात स्वर्गीय डॉक्टर शारदा ऐसी डॉक्टरों में से एक है जिन्होंने त्याग और बलिदान की जो मिसाल पेश की है उसका ऋणी पूरा लखनऊ रहेगा।
गौरतलब है कि लखनऊ कोरोना वायरस के प्रकोप से झुलस रहा था। जहां देखो वहां जिंदगी और मौत की लड़ाई चल रही थी ।उस महामारी के संकट में प्रेग्नेंट होने के बावजूद डॉक्टर शारदा ने देवदूत बनकर लखनऊ वासियों की मदद की। आखिरकार खुद को कोरोना की मरीजों की तीमारदारी करते हुए कोरोना वायरस से ग्रसित होकर 5 सितंबर को उन्होंने अपना शरीर त्यागा।
सहस का दिया परिचय : डॉक्टर पीके दास ने बताया डॉक्टर शारदा के पास थे दो विकल्प
राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्यरत डॉ पीके दास ने यह बताया डॉक्टर शारदा के पास दो विकल्प मौजूद थे। इस कर्म योद्धा ने प्रेग्नेंसी के समय देश के हित को आगे रखते हुए पहले कर्म को चुना ।डॉक्टर पीके दास के अनुसार प्रेगनेंसी की वजह से कम रिस्क वाले जगह काम करने का विकल्प दिया गया लेकिन उन्होंने सेकंड वेव में मरीजों की हालत को देखकर इमरजेंसी वार्ड (क्रिटिकल) पीड़ितों की सेवा करने का निर्णय लिया । यह डॉक्टर शारदा के व्यक्तित्व को छलकता है कि अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना वह सबसे अधिक जोखिम वाले पेशेंट के बीच जाकर उनकी मदद करती थी।
घटना चक्र
डॉक्टर शारदा कोविड-19 से 14 अप्रैल को संक्रमित हुई तब वह 8 महीने की गर्भवती थी।
19 अप्रैल को सांस में दिक्कत लेने की वजह से उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
1 मई 2021 को डॉ शारदा को वेंटिलेटर के सपोर्ट पर रखने की जरूरत पड़ी जब उनका लंग्स काफी खराब हो गया था।
6 मई को जब डॉक्टर शारदा का फिर से एक बार को भी टेस्ट हुआ तो वह कोविड नेगेटिव हो गयी थी लेकिन लंग्स अधिक डैमेज होने की वजह से उन्हें वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ रहा था।
14 जून को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर पीके दास ने लंग्स ट्रांसप्लांट करने की सलाह दी क्योंकि लंग्स काफी संक्रमित हो चुका था।
6 जुलाई को योगी आदित्यनाथ जी ने डॉक्टर शारदा के लंग्स ट्रांसप्लांटेशन के लिए डेढ़ करोड़ की राशि आवंटित कि।
11 जुलाई को डॉक्टर शारदा को एअरलिफ्ट किया गया कि उस अस्पताल के लिए।
5 सितंबर को डॉक्टर शारदा की कैन्स अस्पताल में मौत हुई।
इस वजह से नहीं हो पाई डॉक्टर शारदा की ट्रांसप्लांटेशन
गौरतलब है कि फूड पाइप और ट्रेचिया में कॉम्प्लिकेशन की वजह से डॉक्टर शारदा की लंग्स ट्रांसप्लांट नहीं हो पाई।
वेंटिलेटर पर थी जब दिया बच्चे को जन्म
डॉक्टर शारदा वेंटीलेटर पर थी जब उन्होंने नन्ही सी बच्ची को जन्म दिया मां के साथ बच्चे ने भी खूब लड़ा लेकिन मैंने आखिरी सांस लेकर देश तथा परिवार को अलविदा कहा। लोहिया अस्पताल के सभी डॉक्टर समेत पूरे लखनऊ और देश के डॉक्टरों ने डॉक्टर शारदा को श्रद्धांजलि अर्पित किया। डॉक्टर शारदा हमारे बीच में नहीं है उनके पति डॉ अजय और 5 वर्षीय नन्ही परी को छोड़कर बहुत दूर जा चुकी हैं । उनके साहस और बलिदान का ऋणी पूरा लखनऊ रहेगा उस वारियर को शत-शत नमन।









