लखनऊ: अखिलेश यादव और मायावती ने दी जनता को ईद उल अजहा की मुबारकबाद, बीना चूके सरकार पर यह कहकर कसा तंज

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mayawati and akhliesh yadav tweeted on Bakrid
PIC credit: PTI

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और सपा (समाजवादी पार्टी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को ईद-उल-अजहा की जनता को मुबारकबाद दी और एक बार फिर मायावती ने मौजूदा राज्य व देश की सरकार पर निशाना साधा ।

मायावती ने उच्चतम न्यायालय की तारीफ करते हुए कोरोना संक्रमण के समय दिए गए निर्णय और उनके उठाये गए कदमों की बेहद सराहना करने के साथ  केंद्र और राज्‍य सरकारों से अपील की है की कोरोना संक्रमण को गंभीरता के साथ लेकर जनता के हितों को ध्यान में रख कर कार्य करने की सरकार को दरकार है ।

मायावती ने किया ट्वीट

Mayawati tweet on the occasion of Bakrid
pic credit: ANI

मायावती ने बुधवार को ट्वीट करते हुए लिखा की , ‘‘ईद अल अजहा की सभी को दिली मुबारकबाद एवं शुभकामनाएं। अपने परिवार एवं पड़ोसियों की सुरक्षा एवं भलाई के लिए जरूरी है कि सभी कोरोना वायरस के नियमों का पूरा पालन करते हुए बिना भीड़भाड़ के ईद मनाएं।”

मायावती ने एक और ट्वीट कर न्यायालयों की सरहाना की:  ‘‘कोरोना वायरस से बचाव एवं इसकी रोकथाम के लिए माननीय न्यायालयों ने देर से ही सही, लेकिन सराहनीय कदम उठाया। अब सभी सरकारें भी कोरोना वायरस के प्रति अति-गंभीर होकर जनता की भलाई का पूरा ध्यान रखें एवं लोग भी टीका जरूर लगवाएं।”

 

अखिलेश यादव की ओर से भी आया ट्वीट

pic credit: PTI

कम शब्दों में अखिलेश यादव ने समस्त देशवासियों को “ईद-उल-अज़हा” की मुबारकबाद दी ।त्याग,  बलिदान, समर्पण, आपसी भाइचारे व इंसानियत का पैग़ाम देने वाले पावन पर्व “ईद-उल-अज़हा” की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत मुबारकबाद!

गौरतलब है कि  योगी सरकार ने जहाँ  कोविड-19 की दुष्परिणाम को देखते हुए कावड़ यात्रा को संघ की हामी के बाद रोक दिया तथा वहीँ प्रदेश में बकरीद के अवसर पर भी बड़ा गाइड लाइन लेकर आये थे जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा कम किया जा सके  ।वहीँ केरल में बकरीद के मौके पर केरल सरकार द्वारा पाबंदी में दी गई छूट को कोर्ट ने अनुचित” करार दिया ।

संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए कोर्ट ने  केरल सरकार को इसका अनुपालन करने पर ध्यान देने कहा गया है ।  गौरतलब है 16 जुलाई को उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह कहा था की धार्मिक सहित सभी आस्था किसी के जीवन के अधिकार के आगे कुछ नहीं है अतः हमें इसका पालन करना चाहिए ।

 

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