कोरोना कहर के बाद लखनऊ शहर में ब्लैक फंगस ने अपनी दस्तक दे दी है ।वही ब्लैक फंगस को लेकर पहले से ही लखनऊ के लोगों में जागरूकता है। गौरतलब है कि समय पर इलाज करवाने एवं सजग रहने की वजह से कई जानें बची हैं । आगे खबर विस्तार से ।
लखनऊ में ब्लैक फंगस से मौत के आंकड़े
| तारीख | नई केस | मृत्यु | स्वस्थ्य |
| 15 जून | 15 | 2 | 9 |
| 16 जून | 3 | 0 | 1 |
| 17 जून | 9 | 2 | 9 |
| 18 जून | 11 | 1 | 4 |
| 19 जून | 4 | 1 | 4 |
| 20 जून | 8 | 1 | 0 |
| 21 जून | 10 | 0 | 2 |
गौरतलब है कि लखनऊ में ब्लैक फंगस से मौत के आंकड़ों से अधिक ब्लैक फंगस को मात देने वाले आंकड़े सामने आए हैं ।वहीं दूसरी ओर केजीएमयू के डॉक्टरों का अनुमान है कि आने वाले समय में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में कमी दिखेगी ।
क्या कहते हैं केजीएमयू के चिकित्सक
लखनऊ चिकित्सकों की माने तो लखनऊ में मई महीने में कोरोना संक्रमण के केस कम होने लगे थे लेकिन ब्लैक फंगस ने उसकी जगह ले ली थी। ब्लैक फंगस के केस लखनऊ में आने लगे थे। जिससे फलस्वरूप समय पर इलाज ना करने की स्तिथि में कई मरीजों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। लेकिन अब हालात बेहद काबू में हैं ।
अगर यह लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
| 1 | आँखों और नाक के नीचे सूजन और लाल होना। |
| 2 | चेहरा में सूजन, सुन्न होना और आँखों में जलन और पानी आना । |
| 3 | चेहरे का सूज जाना और सर दर्द होना। |
| 4 | अंग प्रत्यारोपण कराने वाले की इम्युनिटी में कमी आने की वजह से ब्लैक फंगस के चपेट में लोग आ जाते हैं । |
| 5 | कोरोना संक्रमण के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड की मात्रा शरीर में जाने की वजह से भी ब्लैक फंगस के लक्षण देखे गए हैं। |
| 6 | डायबिटिक व कम इम्युनिटी वाले लोगों में ब्लैक फंगस खतरा ज्यादा पाया गया है। |
केजीएमयू के चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस की वजह से लखनऊ में मरीजों को आंख और जबड़े गंवाने पड़े थे ।गौरतलब है कि जून के महीने से कोरोना तथा ब्लॉक फंगस के मामलों में काफी गिरावट देखने मिली है ।सुकून देने वाली खबर यह भी है कि अब ब्लैक फंगस होने के बावजूद लखनऊ में मरीज अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं ।
1 हफ्ते के आंकड़े
| केस की संख्या ( 1 हफ्ते की ) | मृतकों की संख्या | स्वस्थ्य होकर लौटे |
| 60 | 07 | 29 |
पिछले 1 हफ्ते के आंकड़ों की बात करें तो ब्लैक सॉन्ग से 60 मरीज मिले जिसमें 7 मरीजों की मौत हुई लेकिन इसी दौरान विभिन्न अस्पतालों से कुल 30 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए गए हैं जिससे प्रदेश में ब्लैक फंगस को लेकर डर एवं भय माहौल थोड़ा शांत हुआ है ।
डॉ वीरेंद्र आतम, केजीमयू के अनुसार :
केजीएमयू mei कार्यरत डॉ वीरेंद्र आतम मेडिसिन विभाग ने बताया कि ब्लैक फंगस का इलाज न्यूनतम 20 दिनों तक चलता है। मरीज के स्थिति देखेते हुए इलाज थोड़ा लंबा भी खिंच सकता है। लेकिन हर्ष की बात यह है कि इसमें मरीज की संख्या में भारी कमी हुई है। काफी मरीजों के समय से अस्पताल पहुंचने से उनका इलाज समय पर होने से व स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए हैं।इलाज में देरी होने से ज्यादा मरीज प्रभावित हो जाता है एवं जान बचाना मुश्किल हो जाती है।










