लखनऊ आशा ज्योति टीम की प्रभारी अर्चना सिंह की चर्चा आजकल लखनऊ के हर पुलिस थाने में हो रही है और हो भी क्यों ना जो काम एक हफ्ते की कड़ी मशक्कत में पूरी पुलिस टीम नहीं कर पाई वह काम अर्चना ने महज 3 घंटे में कर के मिशाल कायम कर दिया है।
लखनऊ के हुसैनगंज की एक विक्षिप्त युवती को एक हफ्ते से पुलिस टीम उनके परिवार से मिलाने में असमर्थ रही। वहीं अर्चना ने महज 3 घंटे में युवती को परिवार से मिलवाकर परिवार वालो के चेहरे पर पहले जैसी मुस्कान ला दी।
युवती का नाम शबाना बताया जा रहा है
गौरतलब है की युवती का नाम शबाना बताया जा रहा है और वह हुसैनगंज की निवासी हैं। गौरतलब है की शबाना मानसिक तकलीफ से गुजर रहीं हैं और उनका इलाज लखनऊ के नूरमंजिल में चल रहा है।
रास्ता भटक कर पहुंच गई जानकीपुरम
शबाना घर से निकलकर रास्ता भूल कर हुसैनगंज से पैदल जानकीपुरम पहुंच गई । ना उन्हे अपने घर का रास्ता याद था और ना ही परिचित का नंबर याद, जैस की हमने बताया कि शबाना की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
घरवाले हुसनगंज थाना में लिखा गए थे शिकायत

गौरतलब है की हुसैनगंज थाना में शाबान के घर वाले रोज आकार शबाना के बारे में पड़ताल करते थे,लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा।
राहगीर ने पहुंचाया शबाना को जानकीपुरम पुलिस थाने
गौरतलब है की शबाना को राहगीर ने अकेले देखकर जानकीपुरम पुलिस थाना पहुंचाया। इसके बाद भी जानकीपुरम थाना शबाना के परिवार तक नहीं पहुंच पाई। इसके बाद जानकीपुरम थाना ने महिलाओं के लिए बने वन स्टॉप सेंटर पर इसकी सूचना दी। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी अर्चना ने तुरंत इसपर एक्शन लेते हुए सभी थाना क्षेत्रों में पड़ताल की और और पाया की एक परिवार रोज एक गुमशुदा की तलाश कर रहा है। अर्चना ने महज 3 घंटे के अंदर पीड़ित परिवार का घर का एड्रेस निकलवाया और खोई हुई शबाना को परिवार से मिलवा दिया।
किसी ने सच कहा है अगर जज्बा और नेक दिल हो तो आप कोई भी काम कर सकते हैं।










