लखनऊ में रेवड़ी का व्यापार बेहद व्यापक पैमाने पर किया जाता रहा है। वहीं अगर आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो केवल एक महीने में कुल 3 करोड़ का व्यापार होता था। लेकिन कोरोना महामारी ने सब बदल दिया है। जहां अब कारीगर अपना धंधा बदल रहे हैं वहीं कारोबार तीन करोड़ से प्रति माह 80 लाख पर सिमट गया है।
लखनऊ में हुए बीस कारखाने बंद
रेवड़ी व्यापार की बात की जाए तो आर्थिक तंगी की वजह से लखनऊ में 20 कारखाने बंद हो गए हैं । जहां मौलवीगंज, गुरुनाना मार्केट, चारबाग में डेढ़ साल के भीतर 20 कारखाने कोरोना वायरस की वजह से बंद करना पड़ा।
कोरोना बना आर्थिक तंगी बना कारण
कोरोना काल से पहले बात की जाए तो गुरु नानक मार्केट, मौलवी गंज मार्केट, चारबाग में चल रहे पुल 30 से अधिक रेवड़ी कारखाने मैं प्रतिमाह लगभग 3 करोड से अधिक का कारोबार होता था। वही कोरोना कि वजह से यह सिमटकर 80,00000 रह गया है ।वहीं कुछ लोग आर्थिक तंगी की वजह से इस धंधे को छोड़कर अपना दूसरा धंधा करने में लग गए हैं ।आर्थिक कारण मुख्य वजह बताई जा रही है ।चारबाग में थोक रेवड़ी कारोबारी के अनुसार रेवड़ी का कारोबार लखनऊ में लगभग ठप हो गया है ।वही उन्होंने सरकार से गुजारिश की है कि रेवड़ी कारोबार को फिर से पटरी पर लाने के लिए कुछ मदद उन्हें दी जाए।
पंजाब और हरियाणा से आई आर्डर में कमी
गौरतलब है कि लखनऊ से रेवड़ी पंजाब हरियाणा आदि कई राज्यों में डिलीवरी की जाती है ।वही कोरोना महामारी की वजह से पंजाब और हरियाणा से आने वाली ऑर्डर में बेहद कमी आई है ।इसके साथ ही पर्यटन ना आने से व्यापार को काफी नुकसान पहुंचा है।
ताबड़तोड़ बंद हो रहे हैं कारखाने
गौरतलब है कि मौलवीगंज में 6 एवं अमीनाबाद में 6 तथा गुरु नानक मार्केट में पांच रेवड़ी कारखाने बंद हो गए हैं। सभी कारोबारी को या आशा है कि जल्द से जल्द चारबाग से लोकल ट्रेन चलें जहां से उनकी बिक्री अच्छी खासी हो पाए। लखनऊ की बात की जाए तो राजा बाजार मौलवीगंज, गुरुनानक मार्केट, अमीनाबाद गणेश गंज चौक समेत लखनऊ की रेवड़ी मशहूर है जहां लखनऊ में लगभग 100 से अधिक कारखाने रेवड़ी के मौजूद है।










